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पोस्ट ओल क्रेडिट👉 खेत खजाना

खेत खजाना
नई दिल्ली, 30 अक्तूबर। देश के
कपास उत्पादक राज्यों में नए
सीजन का एक माह बीतने के
बावजूद आवकों में सुधार नहीं हो
रहा है। शनिवार को लगभग 30
हजार गांठों की आवक हुई। इसके
बावजूद कपास का भाव सुधार की
तरफ नहीं है। उत्तर भारत की
मंडियों में सीजन से पहले 12
हजार रुपए के स्तर पर होने वाला
कारोबार 8300-8400 पर आ
गया है। जीनिंग मिलें कपास की
आपूर्ति को लेकर संकट का सामना
कर रही है, लेकिन आगे स्पीनिंग
मिलों की मांग न होने से किसानों
को ऊंचे दाम देने को तैयार नहीं है।
स्पीनिंग मिलों के पास रूई का
स्टॉक बढ़ रहा है, लेकिन भाव न
बढ़ने के कारण हर स्तर का बाजार
ठंडा दिखाई दे रहा है। रविवार को
भी उत्तर भारत की कुछ मंडियों में
नरमे का भाव अधिकतम 8350
रुपए तक दिखाई दिया। गुजरात में
शनिवार को कपास का भाव 1400
से 1825 रुपए प्रति 20 किलो के
स्तर पर दर्ज हुआ, जबकि मध्य
प्रदेश में यह 5500 से 7800 के

बीच बोला गया। महाराष्ट्र में कपास
का भाव 6 हजार से लेकर 8 हजार
के बीच चल रहा है, लेकिन यहां
आवकें 5 हजार गांठ से आगे नहीं
बढ़ रही है। कर्नाटक में कपास का
भाव 8300 से लेकर 8900 तक
बोला जा रहा है। रूई के दाम भी
लगातार गिरावट की तरफ बढ़े हैं।
तेलंगाना में 30 एमएम रूई लगभग
64500 रुपए पर कारोबार कर रही
है। जबकि गुंटूर में इसी रूई का
भाव 66500 रुपए तक है।
कर्नाटक में यही क्वालिटी 65200
पर बोली जा रही है। महाराष्ट्र के
जलगांव में 30 एमएम रूई 65
हजार रुपए प्रति कैंडी बोली गई ।
अलवर, खैरथल, बहरोड लाइन पर
28.5 एमएम रूई 61 हजार रुपए
और गुजरात में रेडी रूई का भाव
65 हजार रुपए प्रति कैंडी है।
जानकारों का कहना है कि जल्द ही
कपास की फसल में पोल आती हुई
दिखाई देगी और बाजार सुधार की
दिशा में आगे बढ़ेगा, क्योंकि
हरियाणा-पंजाब में नरमा की फसल
बेहद कमजोर है और अन्य
उत्पादक राज्यों में भी संतोषजनक
स्थिति नहीं है।

अन्य जानकारी

व्यापार अपने विवेक अनुसार ही करे

By vijaypal chahar

विजयपाल चाहर